विस्तृत उत्तर
शिव की प्रथम पत्नी माता सती थीं। सती के पिता प्रजापति दक्ष ने शिव से द्वेष के कारण एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने जानबूझकर शिव को आमंत्रित नहीं किया। जब सती बिना बुलाए वहां गईं, तो दक्ष ने शिव का घोर अपमान किया। अपने पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। शिव ने उनके वियोग में भयंकर प्रलयंकारी तांडव किया और दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया।
कालांतर में वही सती हिमालय के घर माता पार्वती (शैलपुत्री) के रूप में अवतरित हुईं। माता पार्वती ने शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर और कठोर तपस्या की।
यह कथा दर्शाती है कि जीवात्मा (सती/पार्वती) को परमात्मा (शिव) से एकाकार होने के लिए घोर तप, वैराग्य और अनन्य भक्ति के मार्ग से गुजरना पड़ता है।





