विस्तृत उत्तर
छह मुखों वाले (षडानन) भगवान कार्तिकेय की उत्पत्ति भगवान शिव के दिव्य तेज से तारकासुर नामक भयंकर असुर के वध के लिए हुई थी।
वे शौर्य, शक्ति, अनुशासन और देवताओं के सेनापतित्व के प्रतीक हैं।
कार्तिकेय (षडानन) = शिव के दिव्य तेज से तारकासुर वध के लिए उत्पन्न। वे शौर्य, शक्ति, अनुशासन और देवताओं के सेनापतित्व के प्रतीक हैं।
छह मुखों वाले (षडानन) भगवान कार्तिकेय की उत्पत्ति भगवान शिव के दिव्य तेज से तारकासुर नामक भयंकर असुर के वध के लिए हुई थी।
वे शौर्य, शक्ति, अनुशासन और देवताओं के सेनापतित्व के प्रतीक हैं।
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