मंत्र साधनाकार्तिकेय जी का 'ॐ शरवणभवाय नमः' मंत्र'ॐ शरवणभवाय नमः' कार्तिकेय का छह अक्षरों वाला महामंत्र है। यह भीतर के विकारों को नष्ट करता है, साहस बढ़ाता है और कोर्ट-केस तथा मंगल दोष से मुक्ति दिलाता है।#कार्तिकेय#शरवणभव#षडानन
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को मुरुगन और सुब्रमण्यम किस क्षेत्र में कहते हैं?कार्तिकेय को 'मुरुगन' और 'सुब्रमण्यम' दक्षिण भारत में — विशेषतः तमिलनाडु में — कहा जाता है। तमिल परंपरा में मुरुगन सर्वाधिक लोकप्रिय देवता हैं और 'तमिल कडवुल' (तमिलों के देवता) कहे जाते हैं।#मुरुगन
दिव्यास्त्रकार्तिकेय को वेल किसने दिया थाकार्तिकेय को वेल उनकी माता पार्वती ने दिया था। स्कंद पुराण में वर्णित है — 'माँ पार्वती द्वारा दी गई शक्तियों से परिपूर्ण अस्त्र का नाम वेल है।' यह तारकासुर-वध के लिए था।#वेल दाता#माता पार्वती#कार्तिकेय
दिव्यास्त्रकार्तिकेय के अस्त्र का नाम क्या हैकार्तिकेय का प्रमुख अस्त्र 'वेल' है — एक दिव्य भाला जो कुण्डलिनी शक्ति का प्रतीक है। इसी से तारकासुर-वध हुआ और सुरपदम को दो भागों में तोड़ा — एक मोर बना, दूसरा मुर्गा।#कार्तिकेय#वेल#भाला
कार्तिकेय कथातारकासुर के वध के लिए शिव-पुत्र की जरूरत क्यों थी?तारकासुर ने ब्रह्मा से यह वरदान लिया था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से होगा। उसने यह सोचकर यह माँगा था कि संन्यासी शिव का पुत्र कभी नहीं होगा। इस वरदान को पूरा करने के लिए ही कार्तिकेय का जन्म आवश्यक था।#तारकासुर वरदान#शिव पुत्र#तारकासुर वध
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
दोष निवारणचोरी हुई चीज वापस पाने का मंत्रचोरी हुई या खोई वस्तु को पुनः प्राप्त करने के लिए मंगलवार को लाल आसन पर बैठकर भगवान कार्तिकेय के मंत्र 'ॐ शरवणभवाय नमः' या राहु के बीज मंत्र का जप करना चाहिए।#खोई वस्तु#कार्तिकेय#राहु
मंत्र साधनाखोया हुआ धन वापस पाने का मंत्रफंसा हुआ या खोया धन वापस पाने के लिए मंगलवार को भगवान कार्तिकेय के मंत्र 'ॐ शरवणभवाय नमः' का लाल चंदन की माला से जप करना अत्यंत प्रभावशाली है।#खोया धन#कार्तिकेय#हनुमान
रुद्राक्षछह मुखी रुद्राक्ष — कार्तिकेय संबंध?6 मुखी=कार्तिकेय(षण्मुख/सेनापति)। विजय, इच्छाशक्ति, यौन स्वास्थ्य। लाल धागा, मंगलवार।#6 मुखी#कार्तिकेय
लोकतारकासुर कौन था?तारकासुर वह असुर था जिसका वध कार्तिकेय ने किया और जिसके पुत्र त्रिपुरासुर कहलाए।#तारकासुर#स्कंद#कार्तिकेय
दिव्य स्वरूप और प्रतीकस्कंद पुराण में सिंह वाहन की प्राप्ति की कथा क्या है?स्कंद पुराण: कार्तिकेय ने तारकासुर के भाई 'सिंहमुखम' को परास्त किया → सिंहमुखम ने क्षमा माँगी → कार्तिकेय ने उसे विशाल सिंह का रूप दिया और माता दुर्गा का स्थायी वाहन बनने का आशीर्वाद दिया। मार्कण्डेय पुराण: हिमालय ने भी देवी को सिंह प्रदान किया।#सिंहमुखम#कार्तिकेय#तारकासुर
परिवार और सती-पार्वतीकार्तिकेय किसके प्रतीक हैं?कार्तिकेय (षडानन) = शिव के दिव्य तेज से तारकासुर वध के लिए उत्पन्न। वे शौर्य, शक्ति, अनुशासन और देवताओं के सेनापतित्व के प्रतीक हैं।#कार्तिकेय#शौर्य शक्ति#तारकासुर
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग६ मुखी रुद्राक्ष किस देवता का स्वरूप है और इसका मंत्र क्या है?६ मुखी रुद्राक्ष कार्तिकेय स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ ह्रीं हुं नमः' है और यह आरोग्य तथा ऐश्वर्य प्रदान करता है।#6 मुखी#कार्तिकेय#शुक्र
शिव शाबर मंत्रभंडार भरण मंत्र में शिव परिवार का ध्यान क्यों किया जाता है?शिव परिवार की समग्र ऊर्जा (समृद्धि, बुद्धि, शक्ति) को जीवन में स्थापित करने के लिए उनका ध्यान होता है।#शिव परिवार#गौरा#गणेश
पुराण ज्ञानस्कंद पुराण सबसे बड़ा पुराण क्यों है?स्कन्द पुराण में ८१,१०० श्लोक हैं — किसी अन्य पुराण से अधिक, इसीलिए यह सबसे बड़ा है। इसमें ६ खण्ड हैं। काशी, जगन्नाथ, महाकाल, रामेश्वर जैसे तीर्थों की महिमा, नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत और शिवरात्रि का वर्णन है।#स्कंद पुराण#सबसे बड़ा पुराण#कार्तिकेय
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को स्कंद क्यों कहते हैं?कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ में भी यह नाम सार्थक है।#स्कंद#कार्तिकेय#स्कंद अर्थ
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय का पालन-पोषण किसने किया था?कार्तिकेय का पालन-पोषण मुख्यतः कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियों ने किया जिन्होंने उन्हें स्तनपान कराया। इसीलिए वे 'कार्तिकेय' कहलाए। इसके अतिरिक्त गंगा, अग्निदेव और माता पार्वती भी उनकी मातृशक्तियाँ मानी जाती हैं।#कार्तिकेय#कृत्तिकाएं#षण्मुख