विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव और पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) तारकासुर के साथ युद्ध कर रहे थे, तब तारकासुर के दो भाई 'सिंहमुखम' और 'सुरापदमन' भी युद्ध भूमि में उतरे। कार्तिकेय ने अपने पराक्रम से दोनों भाइयों को परास्त कर दिया।
युद्ध में पराजित होने के पश्चात 'सिंहमुखम' को अपनी भूल का आभास हुआ और वह कार्तिकेय के चरणों में गिरकर अपने प्राणों की भिक्षा माँगने लगा। उसकी क्षमा याचना से प्रसन्न होकर, कार्तिकेय ने उसे एक विशाल सिंह का रूप दे दिया और उसे माता दुर्गा का स्थायी वाहन बनने का परम आशीर्वाद प्रदान किया।
इसके अतिरिक्त, मार्कण्डेय पुराण में यह भी उल्लेख है कि पर्वतराज हिमालय ने देवी को सवारी करने के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली सिंह प्रदान किया था।





