विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म और भारतीय दर्शन की सुदीर्घ परंपरा में माँ सरस्वती केवल विद्या, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मात्र नहीं हैं; अपितु वे संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना, ज्ञान के शाश्वत प्रवाह, वाक् (वाणी) और नादब्रह्म का साक्षात् और सर्वोत्कृष्ट स्वरूप हैं।
वैदिक काल के उषाकाल से लेकर पौराणिक युग के विस्तृत आख्यानों और आगम-तंत्र शास्त्रों के गूढ़ रहस्यवाद तक, सरस्वती का स्वरूप निरंतर अधिक व्यापक, सूक्ष्म और दार्शनिक होता गया है।
हिंदू धर्म में देवी सरस्वती को त्रिदेवियों (सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती) में से एक माना जाता है, जो 'पञ्च प्रकृति' का एक अभिन्न अंग हैं। जैन धर्म और बौद्ध धर्म में भी ज्ञान की देवी के रूप में उनकी व्यापक वंदना की जाती है।





