विस्तृत उत्तर
सनातन वांग्मय, श्रुति-स्मृति, पुराण और तंत्र शास्त्रों में 'शक्ति' को परब्रह्म की आदि और अनंत ऊर्जा के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसी शक्ति का सर्वोच्च, सर्वकल्याणकारी और साक्षात स्वरूप माता पार्वती हैं।
शिव यदि विशुद्ध चेतना हैं, तो माता पार्वती उस चेतना को स्पंदित करने वाली मूल प्रकृति और ऊर्जा हैं। शाक्त और शैव दर्शन के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप ही समस्त सृष्टि का मूल आधार है, जिसके बिना सृजन, पालन और संहार की कोई भी प्रक्रिया संभव नहीं है।
दार्शनिक दृष्टिकोण से, वे परब्रह्म की वह 'इच्छा शक्ति', 'ज्ञान शक्ति' और 'क्रिया शक्ति' हैं, जिसके बिना यह चराचर जगत पूर्णतः स्पंदनहीन है। जहाँ शिव 'शून्य' और 'अकर्ता' हैं, वहाँ पार्वती 'सृजन' और 'प्रकृति' हैं। जहाँ शिव 'समाधि' हैं, वहाँ पार्वती 'करुणा' हैं।





