विस्तृत उत्तर
केन उपनिषद और विभिन्न पुराणों में माता पार्वती का एक अत्यंत गूढ़ और प्रसिद्ध नाम 'उमा' प्राप्त होता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या का निश्चय किया, तो उनकी माता मैना ने वात्सल्यवश उन्हें रोकते हुए कहा था— 'उ (हे पुत्री) मा (मत कर)'। इसी मातृ-वात्सल्य से उपजे 'उमा' शब्द से उनका नामकरण हुआ, जो कालांतर में संपूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी का पर्याय बन गया।
उपनिषदों में, विशेषकर 'केन उपनिषद' में, उन्हें 'उमा हैमवती' (स्वर्ण के समान कांतियुक्त अथवा हिमालय की पुत्री) कहा गया है, जो देवताओं के अहंकार को नष्ट कर उन्हें परब्रह्म का ज्ञान प्रदान करती हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





