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विस्तृत उत्तर
जब पार्वती ने अपनी तपस्या के चरम बिंदु पर पहुँचकर अपने भरण-पोषण के लिए सूखे पर्ण (पत्ते) खाना भी पूर्णतः त्याग दिया, तब उनकी इस अकल्पनीय तितिक्षा को देखकर देवताओं और ऋषियों ने उन्हें 'अपर्णा' (अ + पर्णा, जिसने पत्ते भी ग्रहण करने छोड़ दिए हों) नाम से सुशोभित किया।
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