विस्तृत उत्तर
संतोषी माता की पूजा शुक्रवार को करने की परंपरा है:
संतोषी माता का परिचय
संतोषी माता को गणेश जी की पुत्री माना जाता है (कुछ परंपराओं में)। 'संतोषी' = संतोष देने वाली। उनकी व्रत कथा और पूजा विशेषकर 1975 की फिल्म 'जय संतोषी मां' के बाद अत्यंत लोकप्रिय हुई।
शुक्रवार को पूजा का कारण
- 1शुक्र ग्रह = सुख, सौभाग्य, धन: शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन है। शुक्र = भौतिक सुख, वैभव, सौंदर्य। संतोषी माता संतोष (सुख-शांति) प्रदान करती हैं।
- 2देवी का दिन: शुक्रवार को सामान्य रूप से देवी (लक्ष्मी, संतोषी, शुक्र ग्रह देवता) की पूजा का विधान है।
- 3व्रत कथा परंपरा: संतोषी माता की व्रत कथा में 16 शुक्रवार का व्रत करने का विधान है। यह लोक परंपरा से प्रचलित है।
व्रत विधि
- ▸16 शुक्रवार लगातार व्रत।
- ▸गुड़ और चने का भोग (संतोषी माता का प्रिय)।
- ▸व्रत में खट्टा पदार्थ खाना और खिलाना वर्जित।
- ▸सरल और सात्विक पूजा — देवी का चित्र/प्रतिमा, धूप-दीप, व्रत कथा पाठ।
महत्वपूर्ण सावधानी
संतोषी माता की पौराणिक प्रामाणिकता के विषय में विद्वानों में मतभेद है। वेद, पुराण या प्रमुख शास्त्रों में इनका सीधा उल्लेख नहीं मिलता — यह मुख्यतः लोक परंपरा और भक्ति आस्था पर आधारित है। कुछ विद्वान इन्हें गणेश जी की शक्ति/पुत्री मानते हैं।





