विस्तृत उत्तर
कथा और कीर्तन से भगवान के प्रसन्न होने का सुंदर वर्णन है। श्रीहरि पार्षदों सहित सभा में प्रकट हुए। नारदजी ने भगवान और भक्तों की पूजा कर उन्हें सिंहासन पर बैठाया। फिर संकीर्तन आरंभ हुआ। प्रह्लाद करताल बजाने लगे, उद्धव ने झाँझ ली, नारद वीणा बजाने लगे, अर्जुन राग गाने लगे, इंद्र मृदंग बजाने लगे, सनकादि जयघोष करने लगे और शुकदेवजी भाव दिखाने लगे। बीच में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य नटों की तरह नाचने लगे। यह अलौकिक कीर्तन देखकर भगवान प्रसन्न हुए और बोले कि तुम्हारी कथा और कीर्तन से मैं बहुत प्रसन्न हूँ; तुम्हारे भक्ति-भाव ने मुझे वश में कर लिया है, मुझसे वर माँगो।
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