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सनकादि ऋषि और जय विजय की कथा?

संक्षिप्त उत्तर

सनकादि मुनियों ने जय-विजय को रोकने के कारण श्राप दिया, जिससे उनके तीन असुर जन्म हुए।

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विस्तृत उत्तर

सनकादि ऋषि और जय-विजय की कथा वैकुण्ठ के सप्तम द्वार पर घटित होती है। चारों सनकादि मुनि भगवान विष्णु के दर्शन के लिए वैकुण्ठ पहुँचे, लेकिन जय-विजय ने उन्हें साधारण बालक समझकर रोक दिया। मुनियों ने इसे अहंकार और द्वैतभाव माना और उन्हें भौतिक जगत में जन्म लेने का श्राप दिया। भगवान विष्णु स्वयं आए, मुनियों से विनम्रता से बोले और श्राप को अपनी लीला का भाग माना। यही श्राप आगे जय-विजय के तीन असुर जन्मों और भगवान के अवतारों की कथा से जुड़ता है।

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सनकादि ऋषि और जय विजय की कथा को संदर्भ सहित समझें

सनकादि ऋषि और जय विजय की कथा का सबसे सीधा सार यह है: सनकादि मुनियों ने जय-विजय को रोकने के कारण श्राप दिया, जिससे उनके तीन असुर जन्म हुए।

लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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