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विस्तृत उत्तर
जय-विजय कथा में भगवान विष्णु के प्रमुख शत्रु उनके अपने श्रापित द्वारपालों के जन्म माने गए हैं। सत्ययुग में वे हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु बने, जिनका सामना वराह और नृसिंह अवतार से हुआ। त्रेता में वे रावण और कुम्भकर्ण बने, जिन्हें श्रीराम ने मारा। द्वापर में वे शिशुपाल और दन्तवक्र बने, जिन्हें श्रीकृष्ण ने मुक्त किया। ये शत्रु बाहरी रूप से अधर्म के प्रतीक थे, लेकिन भीतर से भगवान की लीला में लौटने वाले पार्षद भी थे।
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