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विस्तृत उत्तर
जय-विजय अपने तीन श्रापित जन्म पूरे होने के बाद वापस वैकुण्ठ गए। उन्होंने भगवान से दूर सात जन्म भक्त रूप में रहने के बजाय तीन जन्म शत्रु रूप में लेना स्वीकार किया था। हर जन्म में भगवान विष्णु ने अलग अवतार लेकर उनका वध और उद्धार किया। तीसरे जन्म में शिशुपाल और दन्तवक्र के रूप में कृष्ण के हाथों मृत्यु के बाद उनका श्राप समाप्त हुआ। बाहरी रूप से वे कृष्ण में समाते दिखे, लेकिन कथा का भाव है कि वे अपने मूल धाम वैकुण्ठ लौट गए।
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