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विस्तृत उत्तर
जय और विजय को सनकादिक मुनियों ने श्राप दिया था। ये चार मुनि सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र माने जाते हैं। वे भगवान विष्णु के दर्शन के लिए वैकुण्ठ पहुँचे थे, लेकिन जय-विजय ने उन्हें सप्तम द्वार पर रोक दिया। इस व्यवहार से मुनियों को लगा कि द्वारपालों में वैकुण्ठ के अनुरूप शुद्धता नहीं रही। क्रोध में उन्होंने जय-विजय को भौतिक जगत में जन्म लेने का श्राप दिया।
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