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विस्तृत उत्तर
विष्णु अवतारों ने जय-विजय को उनके तीन शत्रु जन्मों में वध करके मुक्त किया। पहले जन्म में वराह भगवान ने हिरण्याक्ष और नृसिंह भगवान ने हिरण्यकशिपु का उद्धार किया। दूसरे जन्म में श्रीराम ने रावण और कुम्भकर्ण का वध किया। तीसरे जन्म में श्रीकृष्ण ने शिशुपाल और दन्तवक्र को मुक्त किया। इस प्रकार हर अवतार ने बाहरी रूप से अधर्म का नाश किया और भीतर से अपने श्रापित पार्षदों को वैकुण्ठ लौटने की दिशा दी।
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