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विस्तृत उत्तर
रावण को मुक्ति भगवान श्रीराम के हाथों वध होने से मिली। जय-विजय की कथा के अनुसार रावण कोई साधारण असुर नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के द्वारपाल जय का श्रापित जन्म था। शत्रु रूप में जन्म लेने के कारण उसे भगवान से युद्ध करना था और भगवान के हाथों मृत्यु प्राप्त करनी थी। श्रीराम ने रावण का वध करके धर्म की रक्षा की और साथ ही जय के श्राप का दूसरा चरण समाप्त किया। इसीलिए रावण का अंत केवल दंड नहीं, बल्कि भगवान की लीला में हुआ उद्धार भी माना जाता है।
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