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विस्तृत उत्तर
जय-विजय का दूसरा जन्म त्रेता युग में रावण और कुम्भकर्ण के रूप में हुआ। इस जन्म में जय रावण बने और विजय कुम्भकर्ण बने। रावण में शक्ति और विद्या थी, लेकिन काम, अहंकार और अधर्म उसके पतन का कारण बने। कुम्भकर्ण तमोगुण और निद्रा से जुड़ा रूप माना गया। भगवान विष्णु ने श्रीराम अवतार लेकर दोनों का वध किया और जय-विजय के श्राप का दूसरा चरण समाप्त हुआ।
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