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विस्तृत उत्तर
दन्तवक्र करुष देश का राजा था और जय-विजय कथा में विजय का तीसरा श्रापित जन्म माना जाता है। वह शिशुपाल और शाल्व का मित्र था और भगवान कृष्ण से विरोध रखता था। शिशुपाल की मृत्यु के बाद वह प्रतिशोध की भावना से कृष्ण से युद्ध करने आया। कृष्ण ने रथ से उतरकर गदा से उसका सामना किया और कौमोदकी गदा से उसका वध किया। उसके वध के साथ विजय का तीसरा जन्म समाप्त हुआ और जय-विजय के श्राप की पूर्णता का मार्ग खुला।
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