अन्य अल्पज्ञात एवं शक्तिशाली मंत्र
द्वादशाक्षर और पंचमुखी हनुमान मंत्रों के अतिरिक्त भी अनेक ऐसे मंत्र हैं जो अत्यंत शक्तिशाली हैं परन्तु जनसामान्य में कम प्रचलित हैं। इनकी साधना विधियां और फलश्रुतियां विशिष्ट होती हैं।
स्रोत एवं साधना
यह एक विशिष्ट रात्रि कालीन साधना है। साधक को लाल वस्त्र धारण कर, दक्षिणाभिमुख होकर वीरासन में बैठकर, हनुमान यंत्र को सिन्दूर से पवित्र कर चौकी पर स्थापित करना होता है। दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करने के उपरांत, गुरु पूजन कर, हनुमान जी का ध्यान करते हुए (ध्यान मंत्र: "उद्यन्मार्तण्डकोटिप्रकटरूचियुतंचारूवीरासनस्थं...") हनुमान शक्ति माला से इस मंत्र का 11 माला जप किया जाता है। यह साधना 11 दिनों तक प्रतिदिन की जाती है। जप के उपरांत पूजा स्थान पर ही भूमि पर शयन करने का विधान है। हनुमान जी को अर्पित नैवेद्य (गुड़, घी, आटे से बना प्रसाद) साधक स्वयं ग्रहण करता है।
लाभ
इस अचूक और अद्वितीय साधना से साधकों ने बड़ी-बड़ी विपत्तियों को सरलता से टाला है, भयंकर रोगों से छुटकारा पाया है, और दण्डित व्यक्तियों को भी निदान मिला है।
