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दर्शन एवं तत्त्वज्ञान⏱ 2 मिनट पठन

न्याय दर्शन क्या है आसान भाषा में?

न्याय दर्शन महर्षि गौतम की देन है। यह तर्क और प्रमाण का शास्त्र है जो बताता है कि सत्य की परख कैसे करें।

संक्षिप्त उत्तर

न्याय दर्शन महर्षि गौतम की देन है। यह तर्क और प्रमाण का शास्त्र है जो बताता है कि सत्य की परख कैसे करें। चार प्रमाण हैं — प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। इसके अनुसार ज्ञान से मोक्ष प्राप्त होता है और ईश्वर सृष्टि का निमित्त कारण है।

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विस्तृत उत्तर

न्याय दर्शन महर्षि गौतम द्वारा रचित 'न्यायसूत्र' पर आधारित है। यह भारत का सबसे व्यवस्थित तर्कशास्त्र और प्रमाण-विज्ञान है — किसी भी बात को कैसे प्रमाणित करें, यह इसकी मूल चिन्ता है। सरल भाषा में कहें तो न्याय दर्शन हमें सिखाता है — 'सही-गलत को कैसे परखें और सत्य तक कैसे पहुँचें।'

न्याय में ज्ञान-प्राप्ति के चार प्रमाण माने गये हैं — प्रत्यक्ष (आँखों से देखना), अनुमान (तर्क से जानना), उपमान (तुलना से जानना) और शब्द (आप्त व्यक्ति के वचन से जानना)। इसके अतिरिक्त न्याय में सोलह पदार्थ हैं जिनमें 'तर्क-शैली' और 'वाद-जय-पराजय' के कारण भी बताये गये हैं। यह दर्शन ईश्वर को सृष्टि का निमित्त कारण मानता है और उसके अस्तित्व को तर्कों से सिद्ध करने का प्रयास करता है। न्याय का मत है कि अज्ञान बन्धन का कारण है और ज्ञान-प्राप्ति से मोक्ष मिलता है। वैशेषिक दर्शन न्याय से बहुत मिलता-जुलता है — दोनों मिलकर 'न्याय-वैशेषिक' परम्परा बनाते हैं। आज न्यायशास्त्र के सिद्धान्त विधिशास्त्र और तर्कशास्त्र में भी उपयोगी हैं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

न्याय दर्शन क्या है आसान भाषा में को संदर्भ सहित समझें

न्याय दर्शन क्या है आसान भाषा में का सबसे सीधा सार यह है: न्याय दर्शन महर्षि गौतम की देन है। यह तर्क और प्रमाण का शास्त्र है जो बताता है कि सत्य की परख कैसे करें। चार प्रमाण हैं — प्रत्यक्ष...

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