विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और अन्य पुराणिक वर्णनों में चित्रगुप्त द्वारा पापों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया का विवरण मिलता है। यह प्रक्रिया अटल और निष्पक्ष है।
अग्रसंधानी पंजिका — चित्रगुप्त के पास 'अग्रसंधानी' नामक दिव्य पंजिका है जिसमें जन्म से मृत्यु तक के समस्त कर्म लिखे हैं। इस लेखे को पढ़कर वे पाप प्रस्तुत करते हैं।
कर्मों की 'फिल्म' दिखाना — पुराणों में वर्णन है कि यदि जीव अपने पापों से इनकार करे, तो चित्रगुप्त उसके कर्मों का दृश्य-प्रमाण दिखाते हैं — एक चित्रपट (चलचित्र) की भाँति, जहाँ हर घटना स्पष्ट रूप से दिखती है।
साक्षी के रूप में — चित्रगुप्त स्वयं साक्षी हैं क्योंकि वे उस समय भी उपस्थित थे जब जीव ने पाप किया — चाहे वह अकेले में हो या अँधेरे में। 'चित्र' (दृश्य) + 'गुप्त' (छिपा) — यही उनके नाम का अर्थ है।
निष्पक्षता — चित्रगुप्त न किसी के मित्र हैं, न शत्रु। उनके प्रमाण में कोई भेदभाव नहीं। महाभारत के प्रसंग में एकलव्य और युधिष्ठिर तक को उनके कर्मों का प्रमाण देना पड़ा था।




