विस्तृत उत्तर
वास्तु दोष निवारण के लिए शास्त्रों और परंपरा में कई मंत्रों का विधान है। ये मंत्र वास्तु पुरुष, दिक्पालों और गृह शांति से संबंधित हैं।
प्रमुख वास्तु दोष निवारण मंत्र
- 1वास्तु पुरुष मंत्र:
- ▸'ॐ वास्तोष्पते प्रतिजानीह्यस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रतितन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे।'
— यह ऋग्वेद (7.54.1) का मंत्र है जो वास्तु पुरुष की स्तुति करता है।
- 1वास्तु शांति मंत्र (अथर्ववेद आधारित):
- ▸'ॐ वास्तोष्पते ध्रुवा स्थूणामसत् सौम्यानां। द्रप्सो भेत्ता पुरां शाश्वतीनामिन्द्रो मूर्ध्ना बृहस्पतिः।'
- 1नवग्रह शांति मंत्र — यदि वास्तु दोष ग्रह पीड़ा से जुड़ा हो:
- ▸'ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी...' (नवग्रह स्तोत्र)
- 1सामान्य शांति मंत्र:
- ▸'ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः'
- ▸गृह प्रवेश या शांति अनुष्ठान में प्रयोग
- 1गणपति मंत्र — विघ्न निवारण हेतु:
- ▸'ॐ गं गणपतये नमः' — 108 बार जप
- 1महामृत्युंजय मंत्र — समस्त दोष और अशुभ प्रभाव निवारण:
- ▸'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।'
— यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है।
- 1हनुमान मंत्र — नकारात्मक ऊर्जा और भय निवारण:
- ▸'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्'
जप विधि
- ▸प्रातःकाल स्नान के बाद जप करें।
- ▸पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ▸रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से जप करें।
- ▸न्यूनतम 108 बार या संकल्प अनुसार जप करें।
- ▸40 दिन (एक मण्डल) तक नियमित जप करने से विशेष प्रभाव होता है।
ध्यान दें: गंभीर वास्तु दोष के लिए केवल मंत्र जप पर्याप्त नहीं हो सकता। वास्तु शांति हवन किसी योग्य पंडित या वास्तु विशेषज्ञ से कराना अधिक प्रभावी माना जाता है।





