विस्तृत उत्तर
कार्यालय में सही दिशा में बैठना कार्य सफलता, एकाग्रता और करियर प्रगति को प्रभावित करता है — ऐसा वास्तु शास्त्र में माना जाता है।
कर्मचारियों के लिए
- 1मुख — पूर्व (ऊर्जा, नवीनता) या उत्तर (बुद्धि, अवसर) की ओर।
- 2पीठ — ठोस दीवार की ओर। पीठ पीछे खिड़की, दरवाजा या गलियारा न हो — यह असुरक्षा और अस्थिरता का कारण माना जाता है।
- 3दरवाजा — बैठते समय दरवाजा दिखना चाहिए (पीठ दरवाजे की ओर न हो)।
विभिन्न कार्यों के लिए
- ▸रचनात्मक कार्य — पश्चिम की ओर मुख।
- ▸विश्लेषण/शोध — उत्तर की ओर मुख।
- ▸नेतृत्व/प्रबंधन — दक्षिण-पश्चिम में बैठें, मुख उत्तर/पूर्व।
- ▸बिक्री/संवाद — उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में।
डेस्क पर वास्तु
- 1कंप्यूटर/लैपटॉप — आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) कोने में।
- 2जल पात्र — उत्तर-पूर्व कोने में।
- 3महत्वपूर्ण फाइलें — दक्षिण या पश्चिम में।
- 4गणेश/सरस्वती — डेस्क पर ईशान कोने में छोटी मूर्ति/चित्र।
- 5स्वच्छता — डेस्क व्यवस्थित और स्वच्छ रखें — अव्यवस्था ठहराव का प्रतीक।
निषेध
- ▸बीम (शहतीर) के ठीक नीचे न बैठें — मानसिक दबाव।
- ▸शौचालय की दीवार से सटकर न बैठें।
- ▸टूटी कुर्सी/मेज — तुरंत बदलें।
- ▸कैक्टस/कांटेदार पौधे डेस्क पर न रखें।





