विस्तृत उत्तर
वास्तु दोष निवारण के लिए विभिन्न यंत्रों का प्रयोग शास्त्रसम्मत उपाय माना जाता है। यंत्र एक ज्यामितीय आकृति है जो विशिष्ट ऊर्जा को केंद्रित और संतुलित करती है।
प्रमुख वास्तु दोष निवारण यंत्र
- 1वास्तु दोष निवारण यंत्र — यह सबसे प्रत्यक्ष उपाय है। इसमें वास्तु पुरुष और दिक्पालों की ऊर्जा समाहित मानी जाती है। इसे घर के केंद्र (ब्रह्म स्थान) या मुख्य द्वार पर लगाएं।
- 1श्री यंत्र — सर्वदोष निवारक माना जाता है। यह न केवल वास्तु दोष बल्कि समस्त नकारात्मक ऊर्जा का शमन करता है। ईशान कोण या पूजा स्थल में स्थापित करें।
- 1पंचमुखी हनुमान यंत्र — दक्षिण दिशा के वास्तु दोष के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। दक्षिण दीवार पर लगाएं।
- 1सुदर्शन यंत्र — नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं के निवारण के लिए। मुख्य द्वार के ऊपर या पूजा स्थल में रखें।
- 1मंगल यंत्र — भूमि दोष और मंगल ग्रह से संबंधित वास्तु समस्याओं के लिए।
- 1कुबेर यंत्र — उत्तर दिशा के दोष और आर्थिक समस्याओं के लिए। उत्तर दीवार या तिजोरी के पास रखें।
यंत्र स्थापना के सामान्य नियम
- 1प्राण प्रतिष्ठा — यंत्र को सिद्ध/प्राण प्रतिष्ठित कराना अनिवार्य है। बिना इसके यंत्र मात्र धातु का टुकड़ा रहता है।
- 2शुभ मुहूर्त — यंत्र स्थापना शुभ तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त में करें।
- 3स्वच्छता — यंत्र स्थापन स्थल स्वच्छ और पवित्र होना चाहिए।
- 4नियमित पूजा — स्थापना के बाद नियमित रूप से धूप-दीप दिखाएं।
- 5दिशा — प्रत्येक यंत्र की अपनी निर्धारित दिशा होती है, उसी में लगाएं।
सावधानी: बाजार में अनेक अप्रामाणिक यंत्र बिकते हैं। यंत्र किसी विश्वसनीय स्रोत से ही प्राप्त करें और योग्य पंडित या गुरु से प्राण प्रतिष्ठा अवश्य कराएं।





