विस्तृत उत्तर
सोते समय सिर की दिशा वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद दोनों में महत्वपूर्ण मानी गई है। चरक संहिता (सूत्र स्थान) में शयन नियमों का वर्णन है।
सर्वश्रेष्ठ दिशा
- 1दक्षिण दिशा में सिर — सर्वाधिक शुभ और स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती है। वास्तु और आयुर्वेद दोनों में यह सर्वोत्तम है। दक्षिण यम (धर्मराज) की दिशा है — सिर दक्षिण में रखने से गहरी नींद, दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।
- 1पूर्व दिशा में सिर — दूसरी सर्वश्रेष्ठ दिशा। सूर्य ऊर्जा मस्तिष्क को पोषित करती है। विद्यार्थियों और ज्ञान साधकों के लिए विशेष रूप से उत्तम।
स्वीकार्य दिशा
- ▸पश्चिम दिशा में सिर — मध्यम फलदायक। कुछ शास्त्रों में यश और प्रसिद्धि से जुड़ा माना गया है।
निषिद्ध दिशा
- ▸उत्तर दिशा में सिर — सर्वथा वर्जित। (इसका विस्तृत कारण अगले प्रश्नों में दिया गया है।)
बिस्तर रखने के अन्य वास्तु नियम
- 1दीवार से सटाकर — बिस्तर को दक्षिण या पश्चिम दीवार से सटाकर रखें।
- 2बीम के नीचे नहीं — छत की बीम (शहतीर) सीधे सिर के ऊपर नहीं होनी चाहिए — यह तनाव और सिरदर्द का कारण माना जाता है।
- 3दरवाजे के सामने नहीं — बिस्तर सीधे दरवाजे की सीध में न रखें।
- 4आईना सामने नहीं — बिस्तर के सामने आईना नहीं होना चाहिए। (इसका विस्तृत विवरण प्रश्न 39 में दिया गया है।)
- 5शौचालय की दीवार से दूर — बिस्तर का सिरहाना शौचालय की दीवार से न सटा हो।





