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वास्तु शास्त्र प्रश्नोत्तर (पेज 2) — 64 प्रश्न

वास्तु शास्त्र से जुड़े 64 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 64 प्रश्न

दक्षिण दिशा में सिर करके सोना शुभ है या अशुभ

दक्षिण दिशा में सिर करके सोना अत्यंत शुभ है। अष्टांग हृदय और वास्तु शास्त्र दोनों इसे गहरी नींद, दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। यम दिशा होने से अशुभ मानना भ्रम है — शास्त्रों में यह आयुवर्धक कहा गया है।

शयन दिशादक्षिण दिशावास्तु
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घर में झाड़ू कहाँ रखना चाहिए वास्तु के अनुसार

झाड़ू दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में छिपाकर और खड़ी करके रखें। रसोई, पूजा घर, मुख्य द्वार या बिस्तर के नीचे न रखें। झाड़ू लक्ष्मी का प्रतीक है — इस पर पैर न लगाएं और सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाएं।

झाड़ूवास्तुलक्ष्मी
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वास्तु दोष निवारण के लिए कौन सा यंत्र लगाएं

वास्तु दोष निवारण के लिए प्रमुख यंत्र: वास्तु दोष निवारण यंत्र (ब्रह्म स्थान में), श्री यंत्र (ईशान कोण में), पंचमुखी हनुमान यंत्र (दक्षिण दोष हेतु), और सुदर्शन यंत्र। प्राण प्रतिष्ठा और नियमित पूजा अनिवार्य है।

वास्तु दोषयंत्रवास्तु यंत्र
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बेडरूम में आईना लगाना अशुभ क्यों माना जाता है

बिस्तर के सामने आईना अशुभ माना जाता है — यह अशांत नींद, दांपत्य कलह और नकारात्मक ऊर्जा का गुणन करता है। रात में आईना ढककर रखें या ऐसे लगाएं कि सोते हुए प्रतिबिंब न दिखे।

आईनाबेडरूमवास्तु
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वास्तु में हरा रंग कहां प्रयोग करें

उत्तर दिशा, लिविंग रूम और बेडरूम में हरा रंग शुभ है। दक्षिण, पश्चिम और ब्रह्मस्थान में हरे रंग से बचें। यह धन, बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।

वास्तुहरा रंगदिशा
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वास्तु अनुसार वॉशिंग मशीन कहां रखनी चाहिए

वॉशिंग मशीन उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) या दक्षिण-पूर्व में रखें। ईशान कोण और नैऋत्य कोण में बिल्कुल न रखें। आसपास साफ रखें, पानी न जमा होने दें।

वास्तुवॉशिंग मशीनदिशा
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पूजा घर में चांदी का कछुआ रखने से क्या फायदा

चांदी का कछुआ धन-समृद्धि, माँ लक्ष्मी की कृपा और आर्थिक स्थिरता के लिए शुभ है। उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में पानी के पात्र में रखें। विष्णु के कूर्म अवतार का प्रतीक।

वास्तुचांदी का कछुआपूजा घर
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वास्तु अनुसार घर में कौन सा पेड़ लगाना अशुभ है

पीपल, इमली, कैक्टस (कांटेदार), बोनसाई, मदार (दूधिया पौधे), बेर, बबूल और खजूर घर में नहीं लगाने चाहिए। ये नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक कष्ट लाते हैं।

वास्तुपेड़पौधे
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वास्तु में T शेप के प्लॉट का क्या प्रभाव

T शेप प्लॉट वास्तु में अशुभ है। ऊर्जा असंतुलन, आर्थिक समस्या और पारिवारिक कलह हो सकती है। T-point पर घर भी अशुभ। वास्तु विशेषज्ञ से उपाय करवाएँ।

वास्तुT शेपप्लॉट
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वास्तु के हिसाब से रसोई में फ्रिज कहां रखें

फ्रिज दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में रखें, दरवाजा पूर्व दिशा में खुले। ईशान कोण और दक्षिण दिशा में बिल्कुल न रखें। दीवार से एक फीट दूर रखें।

वास्तुफ्रिजरसोई
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वास्तु में L शेप का घर शुभ है या अशुभ

L शेप का घर वास्तु में अशुभ माना जाता है। कटे हुए कोने ऊर्जा असंतुलन पैदा करते हैं। ईशान का कटना सबसे अशुभ। वास्तु विशेषज्ञ से उपाय करवाएँ।

वास्तुL शेपघर
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वास्तु अनुसार मुख्य द्वार पर तोरण बांधने का लाभ

तोरण नकारात्मक ऊर्जा रोकता है, देवताओं का स्वागत करता है, लक्ष्मी-गणेश की कृपा लाता है। आम/अशोक पत्ते शुभ। पत्ते सूखने पर तुरंत बदलें। 11, 21 या 51 पत्ते रखें।

वास्तुतोरणमुख्य द्वार
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वास्तु अनुसार घर में फव्वारा कहां रखें

उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में फव्वारा रखें। पानी का बहाव घर की ओर हो। दक्षिण, आग्नेय और नैऋत्य दिशा में न रखें। बेडरूम में फव्वारा न लगाएँ।

वास्तुफव्वारावाटर फाउंटेन
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पूजा घर में क्रिस्टल बॉल रखने का वास्तु में क्या लाभ

क्रिस्टल बॉल नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर सकारात्मकता बढ़ाती है। पूजा घर में रखने से वातावरण शुद्ध होता है। बच्चों के कमरे में एकाग्रता बढ़ती है। धूप में रखकर सक्रिय करें।

वास्तुक्रिस्टल बॉलपूजा घर
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वास्तु शास्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर वास्तु शास्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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वास्तु शास्त्र को गहराई से समझने का तरीका

वास्तु शास्त्र के पेज 2 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

64 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।