विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र में जल तत्व को धन, भावनाओं और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। घर में फव्वारे का सही स्थान सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने में सहायक होता है।
फव्वारा रखने की सर्वोत्तम दिशाएँ उत्तर, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और पूर्व हैं। उत्तर दिशा धनाधिपति कुबेर की दिशा मानी जाती है, इसलिए यहाँ फव्वारा रखने से धन में वृद्धि होती है। ईशान कोण में फव्वारा मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और पारिवारिक सामंजस्य को बढ़ाता है।
फव्वारे का पानी हमेशा घर की ओर बहना चाहिए, बाहर की ओर नहीं। बाहर की ओर पानी बहने का अर्थ है धन का बाहर जाना।
किन दिशाओं में फव्वारा न रखें: दक्षिण, दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) और दक्षिण-पश्चिम दिशा में फव्वारा रखना वर्जित है। ये दिशाएँ अग्नि और पृथ्वी तत्व से जुड़ी हैं और जल से इनका विरोध होता है, जिससे घर में आर्थिक परेशानी और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है।
फव्वारे का पानी हमेशा स्वच्छ रखें। गंदा या बंद पड़ा पानी नकारात्मकता लाता है। बेडरूम में फव्वारा न रखें क्योंकि इससे भावनात्मक अस्थिरता आ सकती है।
लिविंग रूम में उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में फव्वारा रखना सर्वोत्तम माना जाता है।





