विस्तृत उत्तर
तुलसी (Holy Basil) हिंदू धर्म में सर्वाधिक पवित्र पौधा माना जाता है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में तुलसी को विष्णुप्रिया और लक्ष्मी स्वरूपा बताया गया है।
तुलसी लगाने की सर्वोत्तम दिशा
- 1उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) — वास्तु शास्त्र के अनुसार यह सर्वश्रेष्ठ दिशा है। ईशान कोण जल तत्व और पवित्रता की दिशा है।
- 1पूर्व दिशा — सूर्योदय की दिशा होने के कारण पूर्व भी उत्तम है। तुलसी को पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिलता है।
- 1घर के प्रांगण/आंगन में — परंपरागत रूप से तुलसी वृंदावन (चबूतरा) घर के आंगन के केंद्र में रखा जाता है।
किस दिशा में न लगाएं
- ▸दक्षिण दिशा — अशुभ मानी जाती है।
- ▸शौचालय या रसोई के पास — अपवित्र स्थान के निकट न रखें।
- ▸भूमि पर सीधे — तुलसी वृंदावन (ऊँचा चबूतरा) बनाकर उसमें लगाएं।
तुलसी पूजन के नियम
- 1प्रतिदिन संध्या काल में तुलसी के समीप दीपक जलाएं।
- 2रविवार को तुलसी न तोड़ें — यह परंपरागत नियम है।
- 3एकादशी को तुलसी पूजन का विशेष महत्व है।
- 4कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष विधान है (तुलसी विवाह)।
- 5पानी — प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल में जल दें।
लाभ
- ▸वातावरण शुद्धि — तुलसी ऑक्सीजन देती है और मच्छरों को दूर करती है।
- ▸धार्मिक पुण्य — तुलसी की उपस्थिति मात्र से घर पवित्र होता है।
- ▸आयुर्वेदिक लाभ — तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
- ▸वास्तु लाभ — सकारात्मक ऊर्जा और शांति।





