विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में ध्यान की विधि शिव पुराण और काश्मीर शैवागम में विस्तार से वर्णित है।
शिव ध्यान का परंपरागत श्लोक
'ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।'
शिव ध्यान की विधि
1बाह्य आलंबन (प्रारंभिक)
- ▸शिवलिंग या शिव-चित्र के सामने बैठें
- ▸दृष्टि शिवलिंग पर स्थिर करें
- ▸'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप
2रूप-ध्यान
शिव पुराण के ध्यान-श्लोक का स्मरण:
- ▸रजत-पर्वत जैसा गौर वर्ण
- ▸मस्तक पर चंद्रमा, गंगा
- ▸त्रिनेत्र, पंचमुख
- ▸हाथों में परशु, मृग, वर-मुद्रा, अभय-मुद्रा
- ▸व्याघ्रचर्म पर पद्मासन
3हृदय-ध्यान
हृदय-कमल में ज्योति-स्वरूप शिव का ध्यान — 'ज्योतिर्लिंग' ध्यान।
4निर्गुण ध्यान (काश्मीर शैवागम)
अहं शिवः' — मैं ही शिव हूँ। शुद्ध चेतना = शिव। यही 'शाम्भव उपाय' है।
ध्यान-काल: पूजा समाप्ति के बाद 10-20 मिनट का मौन ध्यान — पूजा का फल बहुगुणित होता है।





