विस्तृत उत्तर
वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड (सर्ग 51) में नागपाश-मुक्ति का विस्तृत वर्णन है।
स्थिति — राम-लक्ष्मण को नागपाश में बँधा देखकर जाम्बवान, सुग्रीव, विभीषण सब हतप्रभ थे। विभीषण ने स्पष्ट कहा — 'आज तक नागपाश से कोई भी बच नहीं पाया है।' सारी वानर-सेना ने हार मान ली।
हनुमान की युक्ति — हनुमानजी ने यह जाना कि नागपाश को केवल गरुड़देव काट सकते हैं क्योंकि गरुड़ नागों के शत्रु हैं। हनुमान तत्काल पक्षीराज गरुड़ के पास गए और उन्हें सारी कथा सुनाई। पहले गरुड़ ने संकोच किया परंतु हनुमान और नारद मुनि के समझाने पर वे तैयार हो गए।
गरुड़ द्वारा मुक्ति — गरुड़देव लंका पहुँचे और अपनी चोंच से कद्रू के पुत्र नागों को एक-एक करके काटकर समाप्त कर दिया। नागपाश टूटते ही उसका प्रभाव समाप्त हुआ और दोनों भाइयों को चेतना वापस आई। राम ने गरुड़ का धन्यवाद किया और गरुड़ अपने लोक लौट गए।





