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विस्तृत उत्तर
विनता की दासता के अंधकार में उनके दूसरे अंडे से एक दिव्य और तेजस्वी पक्षी का जन्म हुआ — पक्षीराज गरुड़। जन्म के समय उनका तेज इतना प्रखर था कि देवता भी भयभीत हो गए। गरुड़ अपनी माता के साथ ही अपने नाग सौतेले भाइयों के दास के रूप में बड़े हुए और उनके मन में नागों के प्रति गहरी शत्रुता ने जन्म ले लिया। अपनी माता को दासता से मुक्त कराने की इच्छा ही उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गई।
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