दिव्यास्त्रवासवी शक्ति को अमोघास्त्र क्यों कहा जाता है?वासवी शक्ति को अमोघास्त्र इसलिए कहते हैं क्योंकि इसका वार कभी खाली नहीं जा सकता था। इसकी अचूकता इंद्र के दिव्य वचन से बंधी थी।#वासवी शक्ति#अमोघास्त्र#अचूक
अस्त्र शस्त्रपिनाक धनुष की क्या खासियत थी?पिनाक विश्वकर्मा निर्मित शिव का दिव्य धनुष था। इतना भारी कि कोई राजा उठा न सका। इसकी टंकार से पर्वत हिलते थे। इसी से शिव ने त्रिपुरासुर की तीनों नगरियाँ एक बाण से नष्ट की थीं।#पिनाक विशेषता#शिव धनुष#त्रिपुरासुर
दिव्यास्त्रकृष्ण की छाती पर वैष्णवास्त्र का क्या हुआ?कृष्ण की छाती पर आते ही वैष्णवास्त्र एक वैजयंती माला में बदल गया और उनके गले में सुशोभित हो गया क्योंकि कृष्ण स्वयं विष्णु के अवतार थे।#कृष्ण#वैष्णवास्त्र#वैजयंती माला
लोकजम्बू नदी क्या है और कैसे बनती है?जम्बूद्वीप के दिव्य जम्बू वृक्ष के हाथी-आकार के फल गिरकर फटते हैं। उनके रस से जम्बू नदी बनती है जिसे पीने वाले को रोग, बुढ़ापा और शोक नहीं होता।#जम्बू नदी#जम्बू वृक्ष#फल
लोकजम्बूद्वीप का नाम जम्बू क्यों पड़ा?जम्बूद्वीप का नाम एक विशाल दिव्य जम्बू (जामुन) वृक्ष के कारण पड़ा। इसके फलों के रस से जम्बू नदी बनती है और उस रस से जाम्बूनद (दिव्य सोना) उत्पन्न होता है।#जम्बूद्वीप#जम्बू वृक्ष#जाम्बूनद
दिव्यास्त्रआग्नेयास्त्र की अग्नि को सामान्य जल से क्यों नहीं बुझाया जा सकता था?आग्नेयास्त्र की अग्नि दिव्य शक्ति से जागृत थी इसलिए सामान्य जल से नहीं बुझती थी। केवल वरुणास्त्र जैसे दिव्य जल-अस्त्रों से ही इसका प्रतिकार संभव था।#आग्नेयास्त्र#दिव्य अग्नि#बुझाना असंभव
दिव्यास्त्रगरुड़ का जन्म कैसे हुआ?गरुड़ का जन्म विनता के दूसरे अंडे से हुआ। उनका तेज इतना प्रखर था कि देवता भी भयभीत हो गए। वे नाग सौतेले भाइयों के बीच दास के रूप में बड़े हुए।#गरुड़#जन्म#विनता
ध्यान अनुभवध्यान में दिव्य सुगंध आने पर किस देवता की कृपा मानें?चंदन=शिव/विष्णु, कमल/गुलाब=लक्ष्मी/देवी, तुलसी=कृष्ण, कपूर=शिव, केसर=देवी। बिना स्रोत=दिव्य! शुभ=देवता उपस्थिति। कृतज्ञता+ध्यान जारी।#दिव्य#सुगंध#देवता
लोकजनलोक का वातावरण कैसा है?जनलोक का वातावरण दिव्य, प्रकाशमान, सात्त्विक, शांतिपूर्ण और क्लेशों से मुक्त है।#जनलोक#वातावरण#दिव्य
लोकतपोलोक का वातावरण कैसा है?तपोलोक का वातावरण सात्त्विक, दिव्य, नीरव, चिन्मय और आत्म-तेज से प्रकाशित है।#तपोलोक वातावरण#सात्त्विक#दिव्य
लोकनाग मणियाँ क्या होती हैं?नाग मणियाँ महान नागों के फनों पर स्थित दिव्य रत्न हैं जो अतल लोक में सूर्य की तरह प्रकाश फैलाती हैं। इनका प्रकाश शीतल और दिव्य होता है।#नाग मणि#अतल लोक#प्रकाश
सिद्धियाँ और लाभत्रिपुर भैरवी साधना से सम्मोहन शक्ति कैसे मिलती है?त्रिपुर भैरवी साधना से साधक के व्यक्तित्व में दिव्य और चुंबकीय आकर्षण उत्पन्न होता है — सभी लोग स्वाभाविक रूप से उसकी ओर आकर्षित और उसका सम्मान करने लगते हैं।#सम्मोहन शक्ति#चुंबकीय आकर्षण#व्यक्तित्व
ध्यान अनुभवध्यान में किसी दिव्य पुरुष या गुरु के दर्शन होने का मतलब क्या है?गुरु कृपा, मार्गदर्शन, शक्तिपात, इष्ट भक्ति। सावधानी: कल्पना vs वास्तविक। साक्षी — फंसें नहीं। शांति+आनंद=सच्चा। भय=मन। गुरु confirm।#दिव्य#गुरु#दर्शन
मंत्र जप अनुभवमंत्र जप करते समय मीठी सुगंध आने का क्या अर्थ है?अत्यंत शुभ: देवता उपस्थिति, सिद्धि निकट, अनाहत चक्र जागरण। शांत रहें, अहंकार नहीं। गुरु को बताएं। अनुभव व्यक्तिगत।#सुगंध#मीठी#जप