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विस्तृत उत्तर
जनलोक का वातावरण पृथ्वी या स्वर्गलोक से सर्वथा भिन्न है। यह लोक पूर्णतः दिव्य, प्रकाशमान और भौतिक प्रकृति के समस्त क्लेशों से मुक्त है। यहाँ अंधकार, भूख, प्यास, बुढ़ापा, रोग या मृत्यु का भय नहीं होता। जनलोक की ऊर्जा अत्यंत प्रखर, सात्त्विक और शांतिपूर्ण है। यहाँ सूर्य या चंद्रमा के प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह लोक महान योगियों, ऋषियों और कुमारों के आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।
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