विस्तृत उत्तर
नाग मणियाँ महान और श्रेष्ठ नागों (सर्पों) के फनों पर स्थित अत्यंत दिव्य और प्रकाशमान रत्न होती हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध (5.24.12) के अनुसार अतल और अन्य पातालों में रहने वाले विशाल और श्रेष्ठ सर्पों के फनों पर ये मणियाँ सुशोभित होती हैं। इन मणियों में इतना तीव्र और शीतल प्रकाश होता है कि ये अतल लोक के संपूर्ण अंधकार को नष्ट कर देती हैं और वहाँ सर्वत्र प्रकाश फैला देती हैं। चूंकि अतल लोक में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता इसलिए इन नाग मणियों का प्रकाश ही यहाँ के निवासियों के लिए सूर्य के समान कार्य करता है। इन मणियों का प्रकाश इतना दिव्य और आकर्षक होता है कि यहाँ कभी अंधेरा या निराशा प्रतीत नहीं होती।
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