विस्तृत उत्तर
जम्बूद्वीप का नामकरण एक अत्यंत विशाल और दिव्य जम्बू (जामुन) वृक्ष के कारण हुआ है। शास्त्रों के अनुसार इस अलौकिक वृक्ष के फल पर्वतों के समान विशाल और हाथियों के आकार के होते हैं। जब ये विशालकाय फल पककर पर्वत के शिखर से नीचे गिरते हैं तो उनके फटने से निकलने वाले रस से 'जम्बू नदी' का निर्माण होता है। इस पवित्र नदी का मीठा और सुगन्धित रस पीने से वहाँ के निवासियों को कभी बुढ़ापा, रोग, शोक, शारीरिक दुर्गन्ध या थकान नहीं सताती। इसी रस के मिट्टी के साथ संपर्क में आने से और वायु तथा सूर्य के ताप से पकने पर 'जाम्बूनद' नामक दिव्य स्वर्ण (सोना) उत्पन्न होता है जिससे देवगण और विद्याधर अपने आभूषणों का निर्माण करते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





