विस्तृत उत्तर
श्रीरामजी के तीन भाई हैं — भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न। चारों भाइयों का जन्म पुत्रेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप हुआ।
कौशल्या से — श्रीराम (ज्येष्ठ)
कैकेयी से — भरत
सुमित्रा से — लक्ष्मण और शत्रुघ्न
बालकाण्ड में — 'श्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी। चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा॥'
अर्थ — श्याम और गौर शरीरवाली दोनों सुन्दर जोड़ियोंकी शोभा देखकर माताएँ तृण तोड़ती हैं (दृष्टि न लग जाय)। चारों ही शील, रूप और गुणके धाम हैं, तो भी सुखके समुद्र श्रीरामचन्द्रजी सबसे अधिक हैं।





