विस्तृत उत्तर
वृत्रासुर-वध की कथा ऋग्वेद से लेकर श्रीमद्भागवत महापुराण तक सभी में वर्णित है।
वृत्रासुर की शक्ति — वृत्रासुर एक अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी असुर था जिसने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। उसे किसी भी साधारण अस्त्र-शस्त्र से नहीं मारा जा सकता था। वह भगवान का भक्त भी था।
युद्ध — विश्वकर्मा से वज्र प्राप्त होते ही इंद्र का बल और पराक्रम चरम पर पहुँच गया। इंद्र ऐरावत हाथी पर सवार होकर देवताओं की सेना के साथ वृत्रासुर पर टूट पड़े।
वृत्रासुर का भक्ति-भाव — युद्ध में वृत्रासुर ने इंद्र को याद दिलाया — 'इस वज्र में तीन शक्तियाँ हैं — भगवान नारायण की शक्ति, दधीचि की तपस्या और तुम्हारा प्रारब्ध — इसलिए प्रहार करो।' वृत्रासुर जानता था कि उसकी मृत्यु इसी वज्र से होगी।
वध — इंद्र ने पूर्ण बल के साथ वज्र का प्रहार किया। वृत्रासुर का वध हुआ। भागवत में वर्णित है कि वृत्रासुर भगवान विष्णु का भक्त था इसलिए उसे विष्णु-शक्ति से युक्त वज्र द्वारा ही मोक्ष मिला।





