विस्तृत उत्तर
अर्जुन ने अपने वनवास के बाद जब दिव्यास्त्रों की शिक्षा हेतु इंद्रलोक गए तब उन्होंने वहाँ पौलोम और कालकेय नामक भयंकर दानवों का संहार किया था। इन दानवों से युद्ध करते समय जब स्थिति अत्यंत विकट हो गई तब अर्जुन ने पाशुपतास्त्र का प्रयोग कर उनका वध किया। यह इंद्रलोक में किया गया प्रयोग पाशुपतास्त्र की विनाशकारी शक्ति का एक प्रमुख उदाहरण है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अर्जुन ने इस महाअस्त्र का प्रयोग केवल अत्यंत आवश्यक और निर्णायक परिस्थितियों में ही किया।
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