विस्तृत उत्तर
हिन्दू पुराणों और महाकाव्यों में विभिन्न महास्त्रों की चर्चा है। सर्वाधिक शक्तिशाली अस्त्र के विषय में पुराणिक मत इस प्रकार है।
पाशुपतास्त्र — अधिकांश पुराणों और विद्वानों के अनुसार पाशुपतास्त्र सर्वाधिक शक्तिशाली है। यह अकाट्य, अमोघ और सर्वसंहारक है। इसे कोई नहीं रोक सकता। शिव ने अर्जुन को देते समय कहा — 'यह अस्त्र किसी के भी पास नहीं है।'
ब्रह्मांडास्त्र — ब्रह्मा के पाँचों मुखों की शक्ति का प्रतीक। केवल वशिष्ठ के पास था। इसने विश्वामित्र के ब्रह्मास्त्र को पी लिया था।
नारायणास्त्र — विष्णु का अस्त्र — अजेय, एक बार, समर्पण से ही शांत।
श्रेणी का सार — पुराणों में पाँच सर्वशक्तिशाली अस्त्र माने गए हैं — ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, पाशुपतास्त्र, वज्र और सुदर्शन चक्र। इनमें पाशुपतास्त्र को सर्वोच्च माना गया क्योंकि यह अकाट्य है।
भगवद्गीता — श्रीकृष्ण ने कहा — 'अस्त्रों में मैं वज्र हूँ' — जो वज्र की भी उच्च महत्ता दर्शाता है।





