विस्तृत उत्तर
त्रिपुर संहार पाशुपतास्त्र का सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण प्रयोग माना जाता है। इस प्रसंग में भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य के तीन अजेय नगरों का विनाश इसी महाअस्त्र से किया था। त्रिपुरासुर के तीन नगर लोहमय, रजतमय और स्वर्णमय थे जो आकाश में उड़ते थे और अत्यंत शक्तिशाली थे। ये नगर इतने अजेय थे कि किसी भी देवता के लिए इन्हें नष्ट करना असंभव लग रहा था। तब भगवान शिव ने पाशुपतास्त्र से एक ही बाण में तीनों नगरों का विनाश किया। यह घटना धर्म की रक्षा में पाशुपतास्त्र की भूमिका को स्थापित करती है।
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