विस्तृत उत्तर
कालसर्प दोष (कुंडली में सभी ग्रह राहु-केतु के बीच) के निवारण में शिव पूजा अत्यंत प्रभावी मानी गई है:
शिव-नाग संबंध
राहु-केतु = सर्प ग्रह। शिव = नागों के अधिपति (वासुकि गले में)। जो नागों (राहु-केतु) के स्वामी की शरण में है, उसे सर्प ग्रहों का भय नहीं।
विशेष उपाय
1त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक)
कालसर्प दोष निवारण पूजा का सबसे प्रसिद्ध केंद्र। यहां विशेष विधि से कालसर्प शांति पूजा कराई जाती है।
2रुद्राभिषेक
सावन सोमवार या प्रदोष पर शिवलिंग पर रुद्राभिषेक — 11 द्रव्यों से अभिषेक + रुद्री पाठ।
3महामृत्युंजय जप
108 या 1008 बार दैनिक। सवा लाख जप अनुष्ठान (40 दिन) अत्यंत प्रभावी।
4नागपंचमी पूजा
शिवलिंग पर नाग प्रतिमा/चित्र सहित पूजा — राहु-केतु शांति।
5नाग देवता पूजा
शिवलिंग पर काले तिल + दूध अभिषेक। नाग गायत्री मंत्र जप।
6'ॐ नमः शिवाय' नियमित जप
प्रतिदिन 108 बार — सभी ग्रह दोषों का सामान्य निवारण।
needs_review: कालसर्प दोष का प्राचीन पुराणों/वेदों में स्पष्ट वर्णन नहीं — ज्योतिष परंपरा आधारित। योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।





