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विस्तृत उत्तर
शिवलिंग का अर्थ यहाँ जगत के लय से जोड़ा गया है। महादेव के अन्तर्धान के बाद शिवलिंग पूजन की प्रसिद्धि फैलने का वर्णन आता है। फिर कहा गया है कि समग्र जगत को अपने में लय करने के कारण यह लिंग कहा गया है। इसलिए इस प्रसंग में लिंग का अर्थ केवल कोई बाहरी चिह्न नहीं है, बल्कि वह तत्त्व है जिसमें पूरा जगत अंततः लीन होता है। यही अर्थ शिवलिंग को महेश्वर और पार्वती की प्रतिष्ठा से भी जोड़ता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 19, PDF पृष्ठ 88, श्लोक 16
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