विस्तृत उत्तर
ऋषियों ने सूतजी को पुराणों का ज्ञाता इसलिए माना कि उन्होंने समस्त इतिहास, पुराण और धर्मशास्त्रों का विधिपूर्वक अध्ययन किया था और उनकी भलीभांति व्याख्या भी की थी। वे कहते हैं कि वेदवेताओं में श्रेष्ठ भगवान बादरायण और भगवान के सगुण-निर्गुण स्वरूप को जानने वाले अन्य मुनियों ने जिन विषयों को जाना है, उन्हें सूतजी वास्तविक रूप से जानते हैं। ऋषि सूतजी के सरल और शुद्ध हृदय का भी उल्लेख करते हैं और कहते हैं कि इसी कारण वे गुरुजनों की कृपा और अनुग्रह के पात्र बने हैं। गुरुजन अपने प्रेमी शिष्य को गुप्त से गुप्त बात भी बता देते हैं। इसलिए सूतजी को केवल पाठक नहीं, बल्कि परंपरा, अध्ययन, व्याख्या और गुरु-कृपा से सिद्ध वक्ता माना गया।
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