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धर्मशास्त्र से जुड़े सभी प्रश्न(10)

धर्मशास्त्र पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 10 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

सूतजी को पुराणों का ज्ञाता क्यों माना गया?

क्योंकि उन्होंने इतिहास, पुराण और धर्मशास्त्रों का अध्ययन और व्याख्या की थी तथा व्यासादि मुनियों के ज्ञान को जानते थे।

#सूतजी#पुराण#धर्मशास्त्र
लोक

नवमी श्राद्ध का शास्त्रीय महत्व क्या है?

यह मातृ-शक्ति और मातृ-ऋण का श्राद्ध है।

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श्राद्ध परिचय

श्राद्ध क्या होता है?

श्राद्ध = पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक अन्न, जल, पिण्ड, तर्पण अर्पण। 'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्'। तीन ऋणों (देव, ऋषि, पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग। सनातन धर्म का सबसे पवित्र अनुष्ठान।

#श्राद्ध#परिभाषा#अर्थ
लोक

मातृकुल में 5 पीढ़ी तक सपिण्डता क्यों मानी जाती है?

धर्मशास्त्रों में मातृकुल की सपिण्डता पाँच पीढ़ियों तक मानी गई है।

#मातृकुल#5 पीढ़ी#सपिण्डता
लोक

पितृ तर्पण का शास्त्रों में क्या महत्व है?

पितृ तर्पण पितरों की तृप्ति, पितृ ऋण की निवृत्ति और वंशजों के कल्याण का शास्त्रोक्त साधन है।

#पितृ तर्पण महत्व#श्राद्ध कर्म#पितृलोक
भक्ति एवं आध्यात्म

प्रायश्चित क्या होता है धार्मिक दृष्टि से?

प्रायश्चित वह धार्मिक क्रिया है जो पाप के दुष्प्रभाव को कम करती है और चित्त को शुद्ध करती है। इसमें सच्चा पश्चाताप, संकल्प, जप, तप और दान शामिल हैं।

#प्रायश्चित#पाप निवारण#धर्मशास्त्र
धर्मशास्त्र एवं संस्कार

सगोत्र विवाह वर्जित क्यों शास्त्रीय कारण

सगोत्र विवाह इसलिए वर्जित है क्योंकि एक ही गोत्र के लोग एक ही ऋषि के वंशज हैं — अतः भाई-बहन समान हैं। साथ ही एक ही रक्त-वंश में विवाह से अनुवांशिक दोष उत्पन्न होते हैं।

#सगोत्र विवाह#गोत्र#धर्मशास्त्र
धर्मशास्त्र एवं संस्कार

गोत्र क्या है महत्व क्या है

गोत्र उस प्राचीन ऋषि का नाम है जिनसे हमारी पितृ वंश-परंपरा जुड़ी है। यह वंश-पहचान, संकल्प-विधान, विवाह-निर्धारण और पितृ-तर्पण में अनिवार्य है। मुख्य सात गोत्र सप्तर्षियों के नाम पर हैं।

#गोत्र#वंश#ऋषि
हिंदू दर्शन

मनुस्मृति में क्या लिखा है और आज प्रासंगिकता

मनुस्मृति: सृष्टि, संस्कार, गृहस्थ-राज-वर्ण धर्म, मोक्ष — 12 अध्याय, ~2,685 श्लोक। सकारात्मक: नारी सम्मान (3.56), धर्म के 10 लक्षण, राजधर्म। विवादित: वर्ण भेद, स्त्री प्रतिबंध — संभवतः प्रक्षेप। प्रासंगिक: नैतिक सिद्धांत; अप्रासंगिक: जन्म आधारित भेद।

#मनुस्मृति#धर्मशास्त्र#कानून
शास्त्र ज्ञान

श्रुति और स्मृति में क्या अंतर है?

श्रुति = ईश्वरीय, सर्वोच्च प्राधिकार, अपरिवर्तनीय (वेद, उपनिषद)। स्मृति = मनुष्य-रचित, श्रुति से कम प्राधिकार, परिवर्तनीय (स्मृति, पुराण, इतिहास)। विरोध हो तो श्रुति प्रमाण। गीता 'श्रुति-तुल्य' मानी जाती है।

#श्रुति#स्मृति#वेद
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