📖
विस्तृत उत्तर
याज्ञवल्क्य स्मृति और मनुस्मृति के आधार पर मातृकुल में पाँच पीढ़ी तक सपिण्डता मानी जाती है। श्लोक “पंचमात् सप्तमादूर्ध्वमातृतः पितृतस्तथा” का अर्थ है कि मातृकुल से पाँचवीं सीमा तक और पितृकुल से सातवीं सीमा तक सपिण्ड संबंध माना जाता है। यह व्यवस्था श्राद्ध, तर्पण और पारिवारिक शुद्धि-अशुद्धि के नियमों को निर्धारित करती है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?
