विस्तृत उत्तर
विनियोग = मंत्र का 'परिचय पत्र' — जप पूर्व मंत्र की पहचान:
6 अंग
- 1ऋषि: मंत्र द्रष्टा। (जैसे: गायत्री = विश्वामित्र)।
- 2छन्द: लय/गति। (गायत्री = गायत्री छन्द)।
- 3देवता: अधिष्ठाता। (गायत्री = सवित)।
- 4बीज: मूल ध्वनि। (गायत्री = 'ॐ')।
- 5शक्ति: ऊर्जा। (गायत्री = 'भूः')।
- 6कीलक: unlock। (गायत्री = 'स्वः')।
कैसे: हाथ में जल लेकर: 'अस्य श्री [मंत्र नाम] मंत्रस्य [ऋषि] ऋषिः, [छन्द] छन्दः, [देवता] देवता, [बीज] बीजम्, [शक्ति] शक्तिः, [कीलक] कीलकम्, [उद्देश्य] विनियोगः।' — जल छोड़ दें।
सरल: विनियोग न आता हो → 'ॐ' 3 बार + इष्ट ध्यान = विकल्प।





