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मंत्र जप विधि📜 मंत्र शास्त्र, शैव/वैष्णव आगम1 मिनट पठन

मंत्र जप में विनियोग क्या है और कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र परिचय: 6 अंग (ऋषि/छन्द/देवता/बीज/शक्ति/कीलक)। हाथ में जल → 'अस्य श्री... ऋषिः, छन्दः, देवता...' → जल छोड़ें। गायत्री: विश्वामित्र/गायत्री/सविता। सरल: 'ॐ' 3 बार।

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विस्तृत उत्तर

विनियोग = मंत्र का 'परिचय पत्र' — जप पूर्व मंत्र की पहचान:

6 अंग

  1. 1ऋषि: मंत्र द्रष्टा। (जैसे: गायत्री = विश्वामित्र)।
  2. 2छन्द: लय/गति। (गायत्री = गायत्री छन्द)।
  3. 3देवता: अधिष्ठाता। (गायत्री = सवित)।
  4. 4बीज: मूल ध्वनि। (गायत्री = 'ॐ')।
  5. 5शक्ति: ऊर्जा। (गायत्री = 'भूः')।
  6. 6कीलक: unlock। (गायत्री = 'स्वः')।

कैसे: हाथ में जल लेकर: 'अस्य श्री [मंत्र नाम] मंत्रस्य [ऋषि] ऋषिः, [छन्द] छन्दः, [देवता] देवता, [बीज] बीजम्, [शक्ति] शक्तिः, [कीलक] कीलकम्, [उद्देश्य] विनियोगः।' — जल छोड़ दें।

सरल: विनियोग न आता हो → 'ॐ' 3 बार + इष्ट ध्यान = विकल्प।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, शैव/वैष्णव आगम
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