विस्तृत उत्तर
दिग्बंधन = चारों दिशाओं + ऊर्ध्व + अधो = 6/10 दिशाओं को 'बंद' (lock) करना:
क्या है: जप/साधना पूर्व साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच — बाहरी नकारात्मक ऊर्जा अंदर न आए, जप ऊर्जा बाहर न जाए।
सरल विधि
- 1दाहिने हाथ में जल लें।
- 2'ॐ अस्त्राय फट्' बोलते हुए:
- ▸पूर्व → दक्षिण → पश्चिम → उत्तर → ऊर्ध्व (ऊपर) → अधो (नीचे) = 6 दिशाएं।
- ▸प्रत्येक दिशा में दाहिने हाथ से ताली/चुटकी बजाएं।
- 1या: 'ॐ' + चुटकी = 10 दिशाओं में।
कब: अनुष्ठान/तांत्रिक जप = अनिवार्य। सामान्य दैनिक = वैकल्पिक।
लाभ: बाधा निवारण, ऊर्जा संरक्षण, एकाग्रता।





