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मंत्र जप विधि📜 तंत्र शास्त्र, योग शास्त्र1 मिनट पठन

मंत्र जप में भूत शुद्धि का क्या अर्थ है?

संक्षिप्त उत्तर

पंचभूत (पृथ्वी/जल/अग्नि/वायु/आकाश) शुद्धि। बीज: लं/वं/रं/यं/हं — 5 चक्रों पर। भौतिक→दिव्य शरीर। 'मैं आत्मा हूं' भावना। तांत्रिक में अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

भूत शुद्धि = पांच महाभूतों (पृथ्वी/जल/अग्नि/वायु/आकाश) की शरीर में शुद्धि:

अर्थ: 'भूत' = महाभूत (तत्व), 'शुद्धि' = पवित्र करना। शरीर = पंचभूत निर्मित। जप पूर्व इन तत्वों की शुद्धि = शरीर मंत्रमय।

विधि (सरल)

  1. 1पृथ्वी: मूलाधार (गुदा) — 'लं' बोलें + कल्पना: शरीर का भारीपन दूर।
  2. 2जल: स्वाधिष्ठान (नाभि नीचे) — 'वं'।
  3. 3अग्नि: मणिपुर (नाभि) — 'रं' — अग्नि से शरीर शुद्ध।
  4. 4वायु: अनाहत (हृदय) — 'यं'।
  5. 5आकाश: विशुद्धि (गला) — 'हं'।

उद्देश्य: भौतिक शरीर → दिव्य शरीर। 'मैं शरीर नहीं — आत्मा हूं' = भावना। तांत्रिक साधना में अनिवार्य।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, योग शास्त्र
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