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छन्द पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंत्र विधि

मंत्र जप में ऋष्यादि न्यास का क्या अर्थ है?

'ऋषि-छन्द-देवता न्यास बिना जप = तुच्छ फल।' 7 अंग: ऋषि (शिर), छन्द (मुख), देवता (हृदय), बीज (गुह्य), शक्ति (चरण), कीलक (नाभि), विनियोग (अंजलि)। उदाहरण: नवार्ण — ब्रह्मविष्णुरुद्र ऋषि, गायत्री छन्द, महाकाली-लक्ष्मी-सरस्वती देवता। नाम जप/चालीसा में अनिवार्य नहीं।

#ऋष्यादि न्यास#ऋषि#छन्द
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'मंगल करनि कलि मल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की' — इसका अर्थ?

रघुनाथजी की कथा = मंगलकारी + कलियुग के पाप नष्ट करने वाली। बालकाण्ड समापन का छन्द। रामकथा ही कलियुग का सबसे बड़ा साधन।

#बालकाण्ड#मंगल करनि#रघुनाथ कथा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड में कुल कितने दोहे/छन्द हैं?

बालकाण्ड सबसे बड़ा काण्ड — लगभग 361 दोहे + सैकड़ों चौपाइयाँ-छन्द-सोरठे। पृष्ठ 17-340 (गीता प्रेस)। मंगलाचरण से लेकर सीता-राम विवाह और अयोध्या वापसी तक। रामचरितमानस का सबसे विस्तृत काण्ड।

#बालकाण्ड#दोहा संख्या#छन्द
मंत्र जप विधि

मंत्र जप में विनियोग क्या है और कैसे करें?

मंत्र परिचय: 6 अंग (ऋषि/छन्द/देवता/बीज/शक्ति/कीलक)। हाथ में जल → 'अस्य श्री... ऋषिः, छन्दः, देवता...' → जल छोड़ें। गायत्री: विश्वामित्र/गायत्री/सविता। सरल: 'ॐ' 3 बार।

#विनियोग#जप#विधि
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