ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

निर्गुण से जुड़े सभी प्रश्न(10)

निर्गुण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 10 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव तत्त्व

शिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?

विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।

#सगुण#निर्गुण#महेश्वर
शिवस्थान

शिव का निर्विकार और निर्गुण स्थान क्या बताया गया है?

शिव का स्थान महेश्वर का निर्विकार, निर्गुण, विश्वरूप और ऐश्वर्यमय स्थान बताया गया है।

#निर्विकार#निर्गुण#विश्वरूप
गुण और देव रूप

महेश्वर का निर्गुण स्वरूप क्या है?

गुणों से रहित अवस्था को महेश्वरस्वरूप बताया गया है।

#महेश्वर#निर्गुण#शिव
लोक

क्रम मुक्ति और सद्यो मुक्ति में क्या अंतर है?

सद्यो मुक्ति = इसी जन्म में निर्गुण साक्षात्कार से तत्काल मोक्ष — सत्यलोक की यात्रा नहीं। क्रम मुक्ति = देवयान से सत्यलोक, फिर ब्रह्मज्ञान, फिर महाप्रलय में मोक्ष।

#क्रम मुक्ति#सद्यो मुक्ति#अंतर
लोक

सद्यो मुक्ति क्या है?

सद्यो मुक्ति = तत्काल मोक्ष। इसी जन्म में निर्गुण ब्रह्म का साक्षात्कार करने वाले यहीं परब्रह्म में विलीन हो जाते हैं — उन्हें सत्यलोक जाने की जरूरत नहीं।

#सद्यो मुक्ति#तत्काल#ब्रह्म
साक्षी का तत्व दर्शन

श्वेताश्वतर उपनिषद में साक्षी के बारे में क्या कहा गया है?

श्वेताश्वतर उपनिषद (6.11): 'एको देवः सर्वभूतेषु गूढः... साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च' — एक ही देव सभी प्राणियों में छिपा है, वह साक्षी, चैतन्य, विशुद्ध और गुणों से परे है।

#श्वेताश्वतर उपनिषद#एको देवः#सर्वव्यापी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने 'निर्गुण' और 'सगुण' राम में किसे श्रेष्ठ बताया?

तुलसीदासजी ने कहा — 'अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा' — दोनों ब्रह्म के स्वरूप हैं, किसी को बड़ा-छोटा कहना अपराध है। किन्तु सगुण भक्ति (राम की लीला) कलियुग में सुगम मार्ग बताया गया।

#बालकाण्ड#निर्गुण#सगुण
हिंदू दर्शन

निर्गुण ब्रह्म और सगुण ब्रह्म में क्या अंतर

निर्गुण ब्रह्म = निराकार, गुणरहित, 'नेति नेति' (बृहदारण्यक 2.3.6) — ज्ञान मार्ग। सगुण ब्रह्म = साकार, गुणयुक्त (राम, कृष्ण, शिव) — भक्ति मार्ग। गीता 12.5 — निर्गुण कठिन, सगुण सरल। दोनों एक ही ब्रह्म के दो पहलू — जैसे जल और बर्फ।

#निर्गुण#सगुण#ब्रह्म
ध्यान साधना

ध्यान के कितने प्रकार होते हैं?

ध्यान के मुख्य प्रकार हैं — सगुण (इष्टदेव का ध्यान), निर्गुण (निराकार ब्रह्म), ओम्-नाद ध्यान, सोऽहम् ध्यान (श्वास के साथ), त्राटक, विपश्यना, चक्र-ध्यान और मंत्र-ध्यान। गीता (12/2-5) में सगुण ध्यान को नए साधकों के लिए सरल और श्रेष्ठ बताया गया है।

#ध्यान#प्रकार#सगुण
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ब्रह्म का वर्णन कैसे है?

उपनिषदों में ब्रह्म को 'सत्यं ज्ञानमनन्तं' (तैत्तिरीय 2/1) और 'नेति नेति' (बृहदारण्यक 3/9/26) से परिभाषित किया गया है। केनोपनिषद कहता है — ब्रह्म मन-इंद्रियों से परे है। चार महावाक्य — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अयमात्मा ब्रह्म' — उपनिषदों का सार हैं।

#ब्रह्म#उपनिषद#निर्गुण
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।